"डिग्रियों के बोझ तले दबे हैं वो ख्वाब, जो कभी खुली आंखों से देखे थे जनाब।" एक और गहरा अहसास: "हाथ में हुनर है और जेब खाली है, इस दौर के युवाओं की कहानी कुछ ऐसी ही निराली है।"
"डिग्रियों के बोझ तले दबे हैं वो ख्वाब,
जो कभी खुली आंखों से देखे थे जनाब।"
एक और गहरा अहसास:
"हाथ में हुनर है और जेब खाली है,
इस दौर के युवाओं की कहानी कुछ ऐसी ही निराली है।"
जो कभी खुली आंखों से देखे थे जनाब।"
एक और गहरा अहसास:
"हाथ में हुनर है और जेब खाली है,
इस दौर के युवाओं की कहानी कुछ ऐसी ही निराली है।"
69
Praveen Kumar
Cockroach Scout · 100 pts
Related Issues
Unemployment 196 views EXAM FEES IN JOBS 158 views RSS nexus with China to increase inflation in India 222 views Ashok 172 views