मध्य प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी : युवाओं के सपनों पर संकट
मध्य प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी : युवाओं के सपनों पर संकट।
मध्य प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी : युवाओं के सपनों पर संकट
मध्य प्रदेश में बेरोजगारी आज सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुकी है। भाजपा लंबे समय से प्रदेश की सत्ता में है, लेकिन लाखों युवाओं को आज भी रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकारी दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
सरकार लगातार निवेश, उद्योग और रोजगार मेलों की बात करती है, लेकिन प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या लगातार लाखों में बनी हुई है। 2024 में विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों और आर्थिक सर्वेक्षण में भी बेरोजगारों की संख्या को लेकर विरोधाभास सामने आया। एक तरफ सरकार ने बेरोजगारी कम होने का दावा किया, वहीं आर्थिक सर्वेक्षण में 33 लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार बताए गए। �
www.ndtv.com +1
2024 के अंत तक प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या 26 लाख से अधिक बताई गई, जबकि सिर्फ पाँच महीनों में लगभग 35 हजार नए बेरोजगार बढ़ने की बात सामने आई। �
The Sootr +1
भाजपा सरकार ने युवाओं को रोजगार देने के बड़े वादे किए थे। “हर साल लाखों नौकरियां” देने की घोषणाएं हुईं, लेकिन सरकारी भर्ती परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक, संविदा भर्ती और निजी क्षेत्र में सीमित अवसरों ने युवाओं में निराशा बढ़ाई है। कई विभागों में हजारों पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण में रोजगार सृजन की बातें जरूर कही गईं, लेकिन उद्योगों की वृद्धि के बावजूद स्थायी नौकरियों की संख्या अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ी। �
jagsandesh.com +1
सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण और मध्यमवर्गीय युवाओं को हो रही है। लाखों छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं और अस्थायी नौकरियों के भरोसे हैं। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भी युवा रोजगार के मुद्दे पर लगातार आवाज उठा रहे हैं। �
Reddit +1
आज सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो युवा सरकार से करते हैं। यदि समय रहते बड़े स्तर पर रोजगार, उद्योग, शिक्षा और कौशल विकास पर ठोस काम नहीं हुआ, तो बेरोजगारी आने वाले समय में और गंभीर सामाजिक संकट बन सकती है।
मध्य प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी : युवाओं के सपनों पर संकट
मध्य प्रदेश में बेरोजगारी आज सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुकी है। भाजपा लंबे समय से प्रदेश की सत्ता में है, लेकिन लाखों युवाओं को आज भी रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकारी दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
सरकार लगातार निवेश, उद्योग और रोजगार मेलों की बात करती है, लेकिन प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या लगातार लाखों में बनी हुई है। 2024 में विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों और आर्थिक सर्वेक्षण में भी बेरोजगारों की संख्या को लेकर विरोधाभास सामने आया। एक तरफ सरकार ने बेरोजगारी कम होने का दावा किया, वहीं आर्थिक सर्वेक्षण में 33 लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार बताए गए। �
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भाजपा सरकार ने युवाओं को रोजगार देने के बड़े वादे किए थे। “हर साल लाखों नौकरियां” देने की घोषणाएं हुईं, लेकिन सरकारी भर्ती परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक, संविदा भर्ती और निजी क्षेत्र में सीमित अवसरों ने युवाओं में निराशा बढ़ाई है। कई विभागों में हजारों पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण में रोजगार सृजन की बातें जरूर कही गईं, लेकिन उद्योगों की वृद्धि के बावजूद स्थायी नौकरियों की संख्या अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ी। �
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आज सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो युवा सरकार से करते हैं। यदि समय रहते बड़े स्तर पर रोजगार, उद्योग, शिक्षा और कौशल विकास पर ठोस काम नहीं हुआ, तो बेरोजगारी आने वाले समय में और गंभीर सामाजिक संकट बन सकती है।
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Sonu Prajapati
Cockroach Scout · 210 pts
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