ये मेरे ही मुल्क से गद्दारी है !
चल कुछ ऐसा रहा है हर तरफ पर्देदारी है !
चेहरे धूल में छिपाने कैसे हैं बड़ी दुश्वारी है !!
ठेकेदार जिस कौम के हैं वो भटकते फिर रहे,
अच्छी तरह मालूम ये उसी कौम से नायारी है !
वो सरकार हैं गद्दी के लिए परेशां फिर रहे हैं,
ना मुझसे यारी हैं ना उनकी तुझसे से यारी है !
"असीम" दर्द कलेजे में लिए, क्यूं भटकता फिरता है,
मालूम है लाशों पे सियासत से उनकी बरसों यारी है !
अपनी सियासत को देशभक्ति शक्ल दिये फिरते हैं,
अच्छी तरह मालूम है ये मेरे ही मुल्क से गद्दारी है !
अच्छी तरह मालूम है ये मेरे ही मुल्क से गद्दारी है !
अच्छी तरह मालूम है ये मेरे ही मुल्क से गद्दारी है !!
- विनोद सिंह "असीम"
चेहरे धूल में छिपाने कैसे हैं बड़ी दुश्वारी है !!
ठेकेदार जिस कौम के हैं वो भटकते फिर रहे,
अच्छी तरह मालूम ये उसी कौम से नायारी है !
वो सरकार हैं गद्दी के लिए परेशां फिर रहे हैं,
ना मुझसे यारी हैं ना उनकी तुझसे से यारी है !
"असीम" दर्द कलेजे में लिए, क्यूं भटकता फिरता है,
मालूम है लाशों पे सियासत से उनकी बरसों यारी है !
अपनी सियासत को देशभक्ति शक्ल दिये फिरते हैं,
अच्छी तरह मालूम है ये मेरे ही मुल्क से गद्दारी है !
अच्छी तरह मालूम है ये मेरे ही मुल्क से गद्दारी है !
अच्छी तरह मालूम है ये मेरे ही मुल्क से गद्दारी है !!
- विनोद सिंह "असीम"
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Vinodkumar V Singh
Cockroach Commander · 850 pts
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