रोज़गार की कानूनी गारंटी (Employment Guarantee Act)
शहरी एवं कुशल रोज़गार गारंटी कानून' (Urban & Skilled Employment Act) लागू हो: सरकार को विधानसभा में एक सख्त कानून पास करना होगा जिसके तहत राज्य के हर शिक्षित, अर्ध-कुशल और कुशल युवा को साल में कम से कम 200 दिन के सम्मानजनक रोज़गार की कानूनी गारंटी मिले। यदि सरकार आवेदन करने के 30 दिन के भीतर युवा को उसकी योग्यता के अनुसार काम या सरकारी/अर्ध-सरकारी विभागों में नियुक्ति नहीं दे पाती, तो उसे पूरा सम्मानजनक वेतन 'रोज़गार हर्जाने' के रूप में देना सरकार की कानूनी मजबूरी होना चाहिए।
निजी उद्योगों में स्थानीय युवाओं को 75% पक्के रोज़गार की गारंटी धरातल पर हो: राज्य में जितनी भी प्राइवेट कंपनियां, फैक्ट्रियां और बड़े उद्योग चल रहे हैं, उन्हें ज़मीन, बिजली और पानी सरकार जनता के संसाधनों से देती है। इसलिए, उन उद्योगों में 75% नौकरियां स्थानीय युवाओं को मिलना कागज़ों में नहीं, धरातल पर अनिवार्य होना चाहिए। जो कंपनी इसका उल्लंघन करे, उस पर भारी जुर्माना ठोककर उसकी सरकारी रियायतें तुरंत बंद की जानी चाहिए।
सरकारी विभागों के खाली पड़े लाखों पद तुरंत भरे जाएं: अफ़सरशाही काम का बोझ कम करने और बजट बचाने के नाम पर सरकारी पदों को खत्म कर रही है या उन्हें कच्चे (ठेके प्रथा) पर चला रही है। यह युवाओं के साथ सरासर धोखा है। बिजली निगम, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व और पुलिस विभागों में जितने भी स्वीकृत पद खाली पड़े हैं, उन्हें बिना किसी देरी के पक्की भर्ती के माध्यम से तुरंत भरा जाना चाहिए।
हुनर ही योग्यता' (Skill over Degree) का नया कानून बने: सरकार को एक ऐसी नीति लानी होगी जहाँ तकनीकी और व्यावहारिक नौकरियों में केवल कागजी डिग्री को अनिवार्य योग्यता न माना जाए। यदि किसी युवा के पास किसी काम का उच्च स्तरीय व्यावहारिक ज्ञान (Practical Expert) है, तो उसके हुनर की परीक्षा ली जानी चाहिए, न कि उसके स्कूल के सर्टिफिकेट की। हुनर साबित होने पर उसे सीधे प्रमाणित (Certify) कर नौकरी का पात्र माना जाए।
प्रायर लर्निंग रिकॉग्निशन' (RPL - Recognition of Prior Learning) को अनिवार्य किया जाए: जो युवा सालों से धरातल पर मिस्त्री, इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर, या कृषि-तकनीशियन का काम बिना डिग्री के कर रहे हैं, सरकार उनके लिए हर ब्लॉक स्तर पर 'हुनर मूल्यांकन केंद्र' खोले। वहाँ बिना किसी लिखित परीक्षा के, केवल उनके काम का लाइव प्रैक्टिकल टेस्ट लेकर उन्हें सीधे 'गवर्नमेंट सर्टिफाइड स्किल्ड प्रोफेशनल' का दर्जा दिया जाए, ताकि वे बैंकों से लोन ले सकें और बड़े उद्योगों में सम्मानजनक काम पा सकें।
स्टार्टअप और देसी आविष्कारों के लिए 'विशेष ग्रांट' (Deasi Innovation Fund) मिले: गाँव का जो कम पढ़ा-लिखा युवा अपने देसी दिमाग से कृषि, सिंचाई या पर्यावरण के लिए कोई नया यंत्र या जुगाड़ बनाता है, अफ़सरशाही उसे 'अवैध' कहकर प्रताड़ित न करे। बल्कि, सरकार ऐसे आविष्कारों की तकनीकी जांच के लिए जिला स्तर पर एक विंग बनाए और सफल होने पर उस युवा को बिना किसी कागजी औपचारिकता के ₹5 लाख तक की सीधी सरकारी मदद (Incentive) दी जाए ताकि वह अपना लघु उद्योग खड़ा कर सके।
स्किल-बेस्ड विभागीय राइट्स' (Skill-Based Departmental Rights) लागू हों: यदि किसी व्यक्ति ने किसी सरकारी या अर्ध-सरकारी विभाग में सहायक या कुशल कर्मी के रूप में न्यूनतम 3 वर्ष का व्यावहारिक काम किया है और वह उस कार्य में पूरी तरह निपुण है, तो उसे उस विभाग की आगामी नियुक्तियों में 'अनुभव और स्किल' के आधार पर सीधा कानूनी अधिकार (Weightage & Right) मिलना ही चाहिए।
लिखित परीक्षा के बजाय 'लाइव प्रैक्टिकल टेस्ट' (On-Field Assessment) हो: इन अनुभवी लोगों के लिए किताबी और सैद्धांतिक परीक्षाओं का ढर्रा पूरी तरह खत्म होना चाहिए। उनकी योग्यता जांचने के लिए जिला स्तर पर एक तकनीकी बोर्ड बने, जो सीधे उनके काम का 'लाइव प्रैक्टिकल' ले। यदि वे काम करने में निपुण पाए जाते हैं, तो उनके प्रैक्टिकल नंबरों के आधार पर उन्हें सीधे विभाग में प्राथमिकता देकर नियुक्त किया जाए।
'एक्सपर्ट-सर्टिफिकेशन और लैडर सिस्टम' (Expert Certification) बने: जो लोग प्राइवेट सेक्टर में भी किसी काम के विशेषज्ञ बन चुके हैं (जैसे आधुनिक सोलर ग्रिड-फीडिंग या एडवांस मैकेनिक), सरकार उनके हुनर का मूल्यांकन करके उन्हें 'विभागीय मानद विशेषज्ञ' (Certified Departmental Expert) का सर्टिफिकेट दे। इस सर्टिफिकेट के आधार पर उन्हें संबंधित सरकारी विभागों के प्रोजेक्ट्स और तकनीकी कार्यों में सीधे जुड़ने और काम करने का कानूनी अधिकार हो।
ठेका प्रथा (Contractual Exploitation) का अंत हो: विभागों में सहायकों का शोषण करने वाले बीच के ठेकेदारों को पूरी तरह बाहर किया जाए। जो व्यक्ति जिस विभाग के काम में निपुण है, उसे सीधे विभाग के रोल पर (Direct Contract/Pay) लिया जाए, ताकि उसकी मेहनत का पूरा पैसा और सम्मान सीधे उसके खाते में आए, किसी बिचौलिए की जेब में नहीं।
निजी उद्योगों में स्थानीय युवाओं को 75% पक्के रोज़गार की गारंटी धरातल पर हो: राज्य में जितनी भी प्राइवेट कंपनियां, फैक्ट्रियां और बड़े उद्योग चल रहे हैं, उन्हें ज़मीन, बिजली और पानी सरकार जनता के संसाधनों से देती है। इसलिए, उन उद्योगों में 75% नौकरियां स्थानीय युवाओं को मिलना कागज़ों में नहीं, धरातल पर अनिवार्य होना चाहिए। जो कंपनी इसका उल्लंघन करे, उस पर भारी जुर्माना ठोककर उसकी सरकारी रियायतें तुरंत बंद की जानी चाहिए।
सरकारी विभागों के खाली पड़े लाखों पद तुरंत भरे जाएं: अफ़सरशाही काम का बोझ कम करने और बजट बचाने के नाम पर सरकारी पदों को खत्म कर रही है या उन्हें कच्चे (ठेके प्रथा) पर चला रही है। यह युवाओं के साथ सरासर धोखा है। बिजली निगम, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व और पुलिस विभागों में जितने भी स्वीकृत पद खाली पड़े हैं, उन्हें बिना किसी देरी के पक्की भर्ती के माध्यम से तुरंत भरा जाना चाहिए।
हुनर ही योग्यता' (Skill over Degree) का नया कानून बने: सरकार को एक ऐसी नीति लानी होगी जहाँ तकनीकी और व्यावहारिक नौकरियों में केवल कागजी डिग्री को अनिवार्य योग्यता न माना जाए। यदि किसी युवा के पास किसी काम का उच्च स्तरीय व्यावहारिक ज्ञान (Practical Expert) है, तो उसके हुनर की परीक्षा ली जानी चाहिए, न कि उसके स्कूल के सर्टिफिकेट की। हुनर साबित होने पर उसे सीधे प्रमाणित (Certify) कर नौकरी का पात्र माना जाए।
प्रायर लर्निंग रिकॉग्निशन' (RPL - Recognition of Prior Learning) को अनिवार्य किया जाए: जो युवा सालों से धरातल पर मिस्त्री, इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर, या कृषि-तकनीशियन का काम बिना डिग्री के कर रहे हैं, सरकार उनके लिए हर ब्लॉक स्तर पर 'हुनर मूल्यांकन केंद्र' खोले। वहाँ बिना किसी लिखित परीक्षा के, केवल उनके काम का लाइव प्रैक्टिकल टेस्ट लेकर उन्हें सीधे 'गवर्नमेंट सर्टिफाइड स्किल्ड प्रोफेशनल' का दर्जा दिया जाए, ताकि वे बैंकों से लोन ले सकें और बड़े उद्योगों में सम्मानजनक काम पा सकें।
स्टार्टअप और देसी आविष्कारों के लिए 'विशेष ग्रांट' (Deasi Innovation Fund) मिले: गाँव का जो कम पढ़ा-लिखा युवा अपने देसी दिमाग से कृषि, सिंचाई या पर्यावरण के लिए कोई नया यंत्र या जुगाड़ बनाता है, अफ़सरशाही उसे 'अवैध' कहकर प्रताड़ित न करे। बल्कि, सरकार ऐसे आविष्कारों की तकनीकी जांच के लिए जिला स्तर पर एक विंग बनाए और सफल होने पर उस युवा को बिना किसी कागजी औपचारिकता के ₹5 लाख तक की सीधी सरकारी मदद (Incentive) दी जाए ताकि वह अपना लघु उद्योग खड़ा कर सके।
स्किल-बेस्ड विभागीय राइट्स' (Skill-Based Departmental Rights) लागू हों: यदि किसी व्यक्ति ने किसी सरकारी या अर्ध-सरकारी विभाग में सहायक या कुशल कर्मी के रूप में न्यूनतम 3 वर्ष का व्यावहारिक काम किया है और वह उस कार्य में पूरी तरह निपुण है, तो उसे उस विभाग की आगामी नियुक्तियों में 'अनुभव और स्किल' के आधार पर सीधा कानूनी अधिकार (Weightage & Right) मिलना ही चाहिए।
लिखित परीक्षा के बजाय 'लाइव प्रैक्टिकल टेस्ट' (On-Field Assessment) हो: इन अनुभवी लोगों के लिए किताबी और सैद्धांतिक परीक्षाओं का ढर्रा पूरी तरह खत्म होना चाहिए। उनकी योग्यता जांचने के लिए जिला स्तर पर एक तकनीकी बोर्ड बने, जो सीधे उनके काम का 'लाइव प्रैक्टिकल' ले। यदि वे काम करने में निपुण पाए जाते हैं, तो उनके प्रैक्टिकल नंबरों के आधार पर उन्हें सीधे विभाग में प्राथमिकता देकर नियुक्त किया जाए।
'एक्सपर्ट-सर्टिफिकेशन और लैडर सिस्टम' (Expert Certification) बने: जो लोग प्राइवेट सेक्टर में भी किसी काम के विशेषज्ञ बन चुके हैं (जैसे आधुनिक सोलर ग्रिड-फीडिंग या एडवांस मैकेनिक), सरकार उनके हुनर का मूल्यांकन करके उन्हें 'विभागीय मानद विशेषज्ञ' (Certified Departmental Expert) का सर्टिफिकेट दे। इस सर्टिफिकेट के आधार पर उन्हें संबंधित सरकारी विभागों के प्रोजेक्ट्स और तकनीकी कार्यों में सीधे जुड़ने और काम करने का कानूनी अधिकार हो।
ठेका प्रथा (Contractual Exploitation) का अंत हो: विभागों में सहायकों का शोषण करने वाले बीच के ठेकेदारों को पूरी तरह बाहर किया जाए। जो व्यक्ति जिस विभाग के काम में निपुण है, उसे सीधे विभाग के रोल पर (Direct Contract/Pay) लिया जाए, ताकि उसकी मेहनत का पूरा पैसा और सम्मान सीधे उसके खाते में आए, किसी बिचौलिए की जेब में नहीं।
67
Sharwan Kumar
Cockroach Legend · 2785 pts
Related Issues
RSS nexus with China to increase inflation in India 100 views Ashok 77 views Unemployment 91 views employed as unemployed 97 views