सरकारी कॉरपोरेशनों में घोटालों और भ्रष्टाचार पर पूर्ण रोक
व्हिसलब्लोअर (शिकायतकर्ता) को पूर्ण सुरक्षा और इनाम मिले: यदि कॉरपोरेशन का ही कोई ईमानदार कर्मचारी या आम नागरिक किसी बड़े घोटाले या रिश्वतखोरी के सबूत उजागर करता है, तो उसकी पहचान पूरी तरह गुप्त रहनी चाहिए और उसे पूरी सरकारी सुरक्षा मिलनी चाहिए।
ब्लैकलिस्टिंग और 'फास्ट-ट्रैक' अदालतों में सुनवाई हो: घोटालों में लिप्त पाई जाने वाली किसी भी प्राइवेट कंपनी या वेंडर को राज्य के सभी विभागों से हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट (प्रतिबंधित) किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष 'फास्ट-ट्रैक एंटी-करप्शन कोर्ट' बनें, जहाँ अधिकतम 6 महीने के भीतर अंतिम फैसला और सजा तय हो।
यदि किसी कॉरपोरेशन में कोई वित्तीय घोटाला या टेंडर में हेराफेरी साबित होती है, तो केवल सस्पेंशन या ट्रांसफर की खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए। दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और उस प्राइवेट कंपनी/ठेकेदार की निजी संपत्तियों को तुरंत कुर्क (ज़ब्त) किया जाना चाहिए, ताकि जनता के एक-एक पैसे की वसूली उनके घर-ज़मीन बेचकर की जा सके।
हर सरकारी कॉरपोरेशन और ₹1 करोड़ से ऊपर के हर बड़े टेंडर का साल में कम से कम एक बार स्वतंत्र थर्ड-पार्टी फॉरेंसिक ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए। अफ़सर खुद अपने विभाग की जांच न कर सकें; इसके लिए सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधीन एक विशेष भ्रष्टाचार-विरोधी विंग काम करे।
ब्लैकलिस्टिंग और 'फास्ट-ट्रैक' अदालतों में सुनवाई हो: घोटालों में लिप्त पाई जाने वाली किसी भी प्राइवेट कंपनी या वेंडर को राज्य के सभी विभागों से हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट (प्रतिबंधित) किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष 'फास्ट-ट्रैक एंटी-करप्शन कोर्ट' बनें, जहाँ अधिकतम 6 महीने के भीतर अंतिम फैसला और सजा तय हो।
यदि किसी कॉरपोरेशन में कोई वित्तीय घोटाला या टेंडर में हेराफेरी साबित होती है, तो केवल सस्पेंशन या ट्रांसफर की खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए। दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और उस प्राइवेट कंपनी/ठेकेदार की निजी संपत्तियों को तुरंत कुर्क (ज़ब्त) किया जाना चाहिए, ताकि जनता के एक-एक पैसे की वसूली उनके घर-ज़मीन बेचकर की जा सके।
हर सरकारी कॉरपोरेशन और ₹1 करोड़ से ऊपर के हर बड़े टेंडर का साल में कम से कम एक बार स्वतंत्र थर्ड-पार्टी फॉरेंसिक ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए। अफ़सर खुद अपने विभाग की जांच न कर सकें; इसके लिए सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधीन एक विशेष भ्रष्टाचार-विरोधी विंग काम करे।
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Sharwan Kumar
Cockroach Legend · 2785 pts
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