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Healthcare Crisis 5/10 Submitted Haryana 16h ago

स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों पर सख्त सरकारी नियंत्रण (Healthcare Price Regulation)

हर डॉक्टर (चाहे सरकारी हो या प्राइवेट) के लिए पर्चे पर किसी कंपनी का ब्रांडेड नाम लिखने पर पूरी तरह कानूनी रोक होनी चाहिए। डॉक्टर को पर्चे पर केवल दवाई का मूल साल्ट (Chemical Name) लिखना चाहिए, ताकि मरीज़ किसी भी मेडिकल स्टोर से अपनी जेब के हिसाब से सस्ती और अच्छी जेनेरिक दवाई खरीद सके।
प्राइवेट अस्पतालों में होने वाले बड़े ऑपरेशनों (जैसे सिजेरियन डिलीवरी, घुटने का ऑपरेशन, या हार्ट स्टेंट) का जिला स्तर पर एक स्वतंत्र कमेटी द्वारा नियमित रूप से रैंडम ऑडिट होना चाहिए। यदि कोई डॉक्टर सिर्फ कमीशन या टारगेट के लिए बिना ज़रूरत के ऑपरेशन करता पाया जाए, तो उसका लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द होना चाहिए।"
एक सख्त 'मेडिकल प्राइस कैपिंग कानून' लाना चाहिए, जो हर छोटी-बड़ी बीमारी, डिलीवरी, और हार्ट स्टेंट के ऑपरेशनों की एक अधिकतम कीमत (Upper Limit) तय करे। कोई भी निजी अस्पताल उस तय रेट से एक रुपया भी ज्यादा न वसूल सके।
राज्य में सभी प्राइवेट अस्पतालों और लैब्स के लिए बड़ी जांचों (MRI, CT Scan) के दाम एक समान और तर्कसंगत रूप से तय होने चाहिए। साथ ही, अस्पतालों के रिसेप्शन पर सरकार द्वारा तय की गई रेट-लिस्ट का डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड अनिवार्य होना चाहिए, ताकि पारदर्शी बिलिंग हो और 'हिडन चार्ज' का खेल खत्म हो।
राज्य स्तर पर एक सख्त 'एंटी-कार्टेल मेडिकल एक्ट' बनना चाहिए। यदि दो या दो से अधिक अस्पताल या लैब्स आपस में मिलकर इलाज या टेस्ट के दाम फिक्स करते पाए जाएं, तो इसे गंभीर अपराध मानकर उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए और उनके लाइसेंस रद्द हों।
मरीजों को यह पूरी आज़ादी और कानूनी अधिकार मिलना चाहिए कि वे अस्पताल के अंदर के बजाय बाहर की किसी भी प्रमाणित (Certified) लैब से अपनी जांच करवा सकें या बाहर से दवा ला सकें, अस्पताल उन पर कोई दबाव नहीं बना सकेगा।
कोई भी डॉक्टर किसी मरीज़ को तब तक रेफर नहीं कर सकेगा, जब तक कि वह ठोस और लिखित मेडिकल कारण दर्ज न करे। अगर स्थानीय अस्पताल में बेड या वेंटिलेटर खाली है, तो मरीज़ को रेफर करना एक दंडनीय अपराध माना जाना चाहिए।
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Sharwan Kumar
Cockroach General · 1935 pts

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