अधिकारियों का अनिवार्य 'धरातल निरीक्षण' — "एसी कमरों से बाहर निकले प्रशासन, मौके पर हो समाधान"
आज प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे दुखद हकीकत यह है कि बड़े-बड़े अधिकारी और तकनीकी अफ़सर चिलचिलाती धूप या कड़ाके की ठंड में जनता की समस्याओं को देखने धरातल पर नहीं जाते। वे अपने ठंडे एसी कमरों में बैठकर केवल कागजी रिपोर्टों, कंप्यूटर स्क्रीनों और मातहत कर्मचारियों की अधूरी जानकारियों के आधार पर फैसले ले लेते हैं। नतीजा यह होता है कि धरातल (जमीन) की सच्चाई कुछ और होती है और सरकारी फाइलों में कुछ और ही लिख दिया जाता है। इस दूरी के कारण आम जनता, गरीब और ग्रामीण अपनी जायज़ मांगों के लिए भी अफ़सरों की चौखट पर मिन्नतें करने को मजबूर हैं।
अफ़सरशाही के इस सामंती रवैये को बदलना होगा। हमारी सरकार का यह स्पष्ट विज़न है कि शासन और प्रशासन केवल कागजों में नहीं, बल्कि जनता के बीच धरातल पर दिखाई देना चाहिए।
इस नीति के तहत निम्नलिखित कड़े प्रावधान होने चाहिए और हम इन्हें हर हाल में लागू करेंगे:
हफ्ते में 2 दिन 'फील्ड विजिट' अनिवार्य होनी चाहिए: हर प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी (चाहे वह एसडीएम हो, तहसीलदार हो, बिजली/सड़क विभाग के जेई/एक्सईएन हों, या ब्लॉक स्तर के अधिकारी हों) के लिए सप्ताह में कम से कम 2 कार्यदिवस सीधे धरातल (फील्ड) पर जाना अनिवार्य होना चाहिए।
'मौके पर मुआयना' और ऑन-द-स्पॉट फैसला होना चाहिए: अधिकारी केवल दफ्तर में बैठकर शिकायतों का निपटारा नहीं करेंगे। जमीन, रास्ते, जलभराव, फसल खराबा, या सार्वजनिक निर्माण से जुड़े हर विवादित मामले में अधिकारी को खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करना होगा और धरातल की सच्चाई देखकर अपनी मौजूदगी में फैसला लेना चाहिए।
अधिकारियों की लाइव लोकेशन और डिजिटल हाजिरी होनी चाहिए: अफ़सर फील्ड का दौरा केवल कागजों में न दिखा सकें, इसके लिए फील्ड विजिट के दौरान उनकी डिजिटल हाजिरी और लाइव जीपीएस (GPS) लोकेशन सरकारी पोर्टल पर दर्ज होनी चाहिए, ताकि यह साबित हो सके कि वे सचमुच जनता के बीच मौके पर मौजूद थे।
खुली जन-सुनवाई (Open Grievance Camps) होनी चाहिए: अधिकारी गांवों और वार्डों में खुद जाकर खुली चौपालें और जन-सुनवाई शिविर लगाएंगे, ताकि वृद्ध, असहाय और आम लोगों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए जिला या ब्लॉक मुख्यालय तक के चक्कर न काटने पड़ें।
अफ़सरशाही के इस सामंती रवैये को बदलना होगा। हमारी सरकार का यह स्पष्ट विज़न है कि शासन और प्रशासन केवल कागजों में नहीं, बल्कि जनता के बीच धरातल पर दिखाई देना चाहिए।
इस नीति के तहत निम्नलिखित कड़े प्रावधान होने चाहिए और हम इन्हें हर हाल में लागू करेंगे:
हफ्ते में 2 दिन 'फील्ड विजिट' अनिवार्य होनी चाहिए: हर प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी (चाहे वह एसडीएम हो, तहसीलदार हो, बिजली/सड़क विभाग के जेई/एक्सईएन हों, या ब्लॉक स्तर के अधिकारी हों) के लिए सप्ताह में कम से कम 2 कार्यदिवस सीधे धरातल (फील्ड) पर जाना अनिवार्य होना चाहिए।
'मौके पर मुआयना' और ऑन-द-स्पॉट फैसला होना चाहिए: अधिकारी केवल दफ्तर में बैठकर शिकायतों का निपटारा नहीं करेंगे। जमीन, रास्ते, जलभराव, फसल खराबा, या सार्वजनिक निर्माण से जुड़े हर विवादित मामले में अधिकारी को खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करना होगा और धरातल की सच्चाई देखकर अपनी मौजूदगी में फैसला लेना चाहिए।
अधिकारियों की लाइव लोकेशन और डिजिटल हाजिरी होनी चाहिए: अफ़सर फील्ड का दौरा केवल कागजों में न दिखा सकें, इसके लिए फील्ड विजिट के दौरान उनकी डिजिटल हाजिरी और लाइव जीपीएस (GPS) लोकेशन सरकारी पोर्टल पर दर्ज होनी चाहिए, ताकि यह साबित हो सके कि वे सचमुच जनता के बीच मौके पर मौजूद थे।
खुली जन-सुनवाई (Open Grievance Camps) होनी चाहिए: अधिकारी गांवों और वार्डों में खुद जाकर खुली चौपालें और जन-सुनवाई शिविर लगाएंगे, ताकि वृद्ध, असहाय और आम लोगों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए जिला या ब्लॉक मुख्यालय तक के चक्कर न काटने पड़ें।
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Sharwan Kumar
Cockroach Legend · 2785 pts
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