सभी डिजिटल पोर्टलों का पूर्ण विकेंद्रीकरण — "चंडीगढ़ नहीं, हर विभाग का समाधान अब स्थानीय धरातल पर हो"
आज सरकार के लगभग सभी विभागों (जैसे—नगर निगम, बिजली, पानी, राशन, पेंशन, राजस्व, और कृषि) को डिजिटल और ऑनलाइन तो बना दिया गया है, लेकिन इसके पीछे छिपी अव्यवस्था के कारण आम जनता और नागरिक सबसे ज्यादा परेशान हैं। किसी भी विभाग के पोर्टल या आईडी में एक छोटी सी तकनीकी गलती, नाम की स्पेलिंग में त्रुटि, या गलत डेटा चढ़ जाने पर स्थानीय अधिकारियों के हाथ पूरी तरह बांध दिए गए हैं। 'ऊपर से लॉक है' या 'चंडीगढ़ मुख्यालय से ठीक होगा' कहकर आम आदमी को महीनों दफ्तरों के चक्कर कटवाए जाते हैं।
डिजिटल सिस्टम का मकसद जनता की सेवा करना होना चाहिए, उनके लिए परेशानी का सबब बनना नहीं। इसलिए हमारी सरकार सभी सरकारी विभागों के डिजिटल सिस्टम का पूर्ण विकेंद्रीकरण (Decentralization) करेगी।
इस नीति के तहत निम्नलिखित कड़े प्रावधान होने चाहिए और हम इन्हें हर विभाग में सुनिश्चित करेंगे:
सभी विभागों में स्थानीय सुधार का अधिकार (Universal Local Power): चाहे राशन कार्ड में नाम सुधारना हो, बिजली के गलत बिल को ऑनलाइन ठीक करना हो, पेंशन पोर्टल की त्रुटि हो, या जमीन/फसल का रिकॉर्ड हो—इन सभी को तुरंत दुरुस्त करने का पूरा डिजिटल राइट (लॉगिन और सुधार का अधिकार) स्थानीय स्तर पर तहसीलदार, बीडीओ (BDO), नगर निगम कमिश्नर या संबंधित ब्लॉक अधिकारी को होना ही चाहिए।
चंडीगढ़ की निर्भरता पूरी तरह खत्म हो: किसी भी आम नागरिक की तकनीकी समस्या को ठीक करने के लिए फाइल को जिला कार्यालय या चंडीगढ़ मुख्यालय भेजने की मजबूरी पूरी तरह खत्म होनी चाहिए। धरातल पर जो अधिकारी मौजूद है, वही मौके की सच्चाई देखकर पोर्टल पर तुरंत फैसला ले सके।
5 दिन की सख्त समय-सीमा (5-Day SLA): किसी भी विभाग के पोर्टल या ऑनलाइन रिकॉर्ड से जुड़ी जनता की शिकायत का निवारण स्थानीय अधिकारी द्वारा अधिकतम 5 कार्यदिवस के भीतर होना ही चाहिए। यदि सर्वर या सॉफ्टवेयर की गलती से काम अटकता है, तो अधिकारी को ऑफलाइन माध्यम से काम पूरा करने का अधिकार होना चाहिए।
जनता की सहूलियत सर्वोपरि: कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर या पोर्टल सरकार के नियम तय करने के लिए हैं, आम जनता को प्रताड़ित करने के लिए नहीं। डिजिटल सिस्टम को जनता के अनुकूल बनाया जाना चाहिए, न कि जनता को सिस्टम के गुलाम के रूप में छोड़ दिया जाए।
डिजिटल सिस्टम का मकसद जनता की सेवा करना होना चाहिए, उनके लिए परेशानी का सबब बनना नहीं। इसलिए हमारी सरकार सभी सरकारी विभागों के डिजिटल सिस्टम का पूर्ण विकेंद्रीकरण (Decentralization) करेगी।
इस नीति के तहत निम्नलिखित कड़े प्रावधान होने चाहिए और हम इन्हें हर विभाग में सुनिश्चित करेंगे:
सभी विभागों में स्थानीय सुधार का अधिकार (Universal Local Power): चाहे राशन कार्ड में नाम सुधारना हो, बिजली के गलत बिल को ऑनलाइन ठीक करना हो, पेंशन पोर्टल की त्रुटि हो, या जमीन/फसल का रिकॉर्ड हो—इन सभी को तुरंत दुरुस्त करने का पूरा डिजिटल राइट (लॉगिन और सुधार का अधिकार) स्थानीय स्तर पर तहसीलदार, बीडीओ (BDO), नगर निगम कमिश्नर या संबंधित ब्लॉक अधिकारी को होना ही चाहिए।
चंडीगढ़ की निर्भरता पूरी तरह खत्म हो: किसी भी आम नागरिक की तकनीकी समस्या को ठीक करने के लिए फाइल को जिला कार्यालय या चंडीगढ़ मुख्यालय भेजने की मजबूरी पूरी तरह खत्म होनी चाहिए। धरातल पर जो अधिकारी मौजूद है, वही मौके की सच्चाई देखकर पोर्टल पर तुरंत फैसला ले सके।
5 दिन की सख्त समय-सीमा (5-Day SLA): किसी भी विभाग के पोर्टल या ऑनलाइन रिकॉर्ड से जुड़ी जनता की शिकायत का निवारण स्थानीय अधिकारी द्वारा अधिकतम 5 कार्यदिवस के भीतर होना ही चाहिए। यदि सर्वर या सॉफ्टवेयर की गलती से काम अटकता है, तो अधिकारी को ऑफलाइन माध्यम से काम पूरा करने का अधिकार होना चाहिए।
जनता की सहूलियत सर्वोपरि: कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर या पोर्टल सरकार के नियम तय करने के लिए हैं, आम जनता को प्रताड़ित करने के लिए नहीं। डिजिटल सिस्टम को जनता के अनुकूल बनाया जाना चाहिए, न कि जनता को सिस्टम के गुलाम के रूप में छोड़ दिया जाए।
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Sharwan Kumar
Cockroach Legend · 2785 pts
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