उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर सिस्टम क्या सही है क्या किसी खास कम्युनिटी को टारगेट किया जा रहा है
उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर प्रणाली और किसी विशेष समुदाय को टारगेट किए जाने का मुद्दा अत्यधिक विवादास्पद है, जहाँ सरकार इसे 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति और अपराध नियंत्रण बताती है, वहीं मानवाधिकार संगठन और विपक्षी दल इसे कानून के दायरे से बाहर (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग) मानते हैं। 1. सरकारी आंकड़े और अपराध नियंत्रण (एनकाउंटर की स्थिति)उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार, मार्च 2017 से अब तक कुल 17,000 से अधिक पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) हुए हैं, जिनमें 289 कुख्यात अपराधी मारे गए हैं और हजारों घायल हुए हैं सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कई मौकों पर यूपी पुलिस की मुठभेड़ों (विशेष रूप से पैरों में गोली मारने की रणनीति) पर कड़ी आपत्ति जताई है。न्यायालय की चेतावनी: अदालतों का सख्त रुख है कि किसी भी आरोपी को सजा देने या सबक सिखाने का अधिकार पुलिस को नहीं, बल्कि केवल न्यायपालिका को है。कानून के शासन (Rule of Law) में किसी भी प्रकार की न्यायिक प्रक्रिया से इतर हत्याओं की अनुमति नहीं है।
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shishpal gautam
Cockroach General · 1680 pts
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