सीएजी ने अतीत में सरकारी विभागों में हुए कुछ घोटालों या संदिग्ध गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया है। सार्वजनिक कंपनियों और सरकारी निधियों का ऑडिट करना चाहिए?
क्षा खरीद से जुड़े रफाल सौदे को लेकर विपक्ष ने सरकार पर कई आरोप लगाएं हैं। इस बजट सत्र यानी 16वीं लोकसभा के अंतिम सत्र के ख़त्म होने से एक दिन पहले सरकार ने विपक्ष के ज़बरदस्त विरोध के बीच रफ़ाल सौदे पर कम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटरल जनरल यानी कैग की रिपोर्ट लोकसभा में पेश की।\n\nवर्तमान में क्या आरोप है कैग पर?\nहितों के टकराव का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक राजीव महर्षि से अनुरोध किया था कि वह 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के करार की ऑडिट प्रक्रिया से खुद को अलग कर लें, क्योंकि तत्कालीन वित्त सचिव के तौर पर वह राफेल वार्ता का हिस्सा रहे थे। विपक्ष ने यह भी कहा कि राजीव महर्षि द्वारा संसद में राफेल पर रिपोर्ट पेश करना नैतिक रूप से सही नहीं होगा।\n\nसंविधान में कैग का ज़िक्र\nभारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 में कैग का ज़िक्र आता है। सीएजी को हिंदी में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक भी कहते हैं। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।\n\nभारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक को राष्ट्रीय वित्त का संरक्षक कहा जाता है और ये इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट डिपार्टमेंट का हेड होता है। डा. अम्बेडकर ने कैग को भारतीय संविधान का सबसे अहम् प्राधिकारी बताया था। ये कैग रिपोर्ट ही था जिसने कोयला और 2 जी स्पेक्ट्रम जैसे घोटालों को उजागर किया था।
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shishpal gautam
Cockroach General · 1430 pts
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