सरकारी पैसे का दुरूपयोग नेता और सरकारी अफसर कर रहे है कोई योजना अगर 1 करोड़ की है उसकी पब्लिसिटी के लिए 30 लाख खर्च कतरे है ये हर भारतीय का पैसा है जो विकास पर खर्च होना चाइये लेकिन चेहरा चमकाने के लि
जनता के पैसों के दुरुपयोग (विज्ञापन और पब्लिसिटी में) को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कॉमन कॉज बनाम भारत संघ मामले में सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। इन नियमों का उल्लंघन होने पर कोई भी नागरिक सीधे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की CCRGA समिति के पास शिकायत दर्ज करा सकता है।सरकारी विज्ञापनों में जनता की गाढ़ी कमाई के बेतहाशा खर्च को नियंत्रित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा निर्धारित मुख्य नियम इस प्रकार हैं:राजनीतिक प्रचार पर रोक: सरकारी विज्ञापनों का इस्तेमाल सत्ताधारी दल के राजनीतिक हितों को चमकाने या विपक्ष की आलोचना करने के लिए नहीं किया जा सकता।मंत्रियों की तस्वीरों का नियम: विज्ञापनों में सत्तारूढ़ नेताओं (जैसे मुख्यमंत्री या मंत्री) की तस्वीरें प्रकाशित करने की अनुमति नहीं है। विज्ञापनों में केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश की तस्वीरें ही इस्तेमाल की जा सकती हैं।पार्टी के प्रतीक (Logo) का इस्तेमाल नहीं: किसी भी सरकारी विज्ञापन में राजनीतिक दल का झंडा, प्रतीक या लोगो का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है।जनता की भलाई के लिए सूचना: विज्ञापन केवल उन्हीं योजनाओं और नीतियों के बारे में होने चाहिए, जो नागरिकों के कानूनी अधिकारों, कल्याणकारी योजनाओं और पात्रता से संबंधित हों।ऑडिट और पारदर्शिता: प्रत्येक मंत्रालय या विभाग को अपने विज्ञापनों का बजट पहले से घोषित करना होता है, जो CAG ( Comptroller and Auditor General of India) की जांच के दायरे में आता है
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shishpal gautam
Cockroach General · 1680 pts
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